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शनिवार, 14 जुलाई 2012

तुम तो हो उस पार साजन

तुम तो हो उस पार साजन
मैं कैसे तुम तक आऊं
बीच में यह दुनिया सागर सी
तिल तिल जलती जाऊं
चातक सी तृष्णा लिए मन में
बदरा की आस लगाऊं
कैसे नापूं सीमा विरह की
कैसे प्यार मैं पाऊं
दिल में अथाह सागर आंसूं का
पर सूखे पीड़ा में भरे लोचन
कैसे बेडा पार लगाऊं
मंज़िल पल पल मुझे पुकारे
मिलन की नित्य मैं आस लगाऊं
अल्हड मन अनहद गीत स्वर
दर्द का नया गीत बुन जाऊं
करवटों में बीती रतियां
तुम में मैं खो जाऊं
थक गए हैं मन के पखेरू
बोझिल सी हो गई है साँसे
गीत गुजरिया सा बना बंजारिन
मदहोशी सह न पाऊं
कैसे अपना नीड़ बसाऊं
कैसे मैं तुझ तक आऊं
तुम तो हो उस पार साजन
विरह की अग्न से जल जल जाऊं!!

शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011

तलाश

जाने लोग यहाँ क्या-क्या तलाश करते हैं
पतझड़ों में हम सावन की राह तक़ते हैं
अनसुनी चीखों का शोर हैं यहाँ हर तरफ़
गुँगे स्वरों से नगमे सुनने की बात करते हैं

जाने लोग यहाँ क्या-क्या तलाश करते हैं .....

बाँट गयी है यह ज़िंदगी यहाँ कई टुकड़ों में
टूटते सपनों में,अनचाहे से रिश्तों में
अजनबी लगते हैं सब चेहरे यहाँ पर
हम इन में अपनों की तलाश करते हैं

जाने लोग यहाँ क्या-क्या तलाश करते हैं .....

हर गली हर शहर में डर है यहाँ फैला हुआ
सहमा-सहमा सा माहौल हर तरफ़ यहाँ बिखरा हुआ
संगदिल हो गयी है यहाँ अब हर दिल की धड़कन
बंद दरवाज़ो में हम रोशनी तलाश करते हैं

जाने लोग यहाँ क्या-क्या तलाश करते हैं ...........

सब की ज़ुबान पर है यहाँ अपने दर्द की दास्तान
फैली हुई हर तरफ़ नाकाम मोहब्बत की कहानियाँ
टूटा आईना लगता है हर शख़्स का वज़ूद यहाँ
हम अपने गीतों में फिर भी खुशी की बात रखते हैं

जाने लोग यहाँ क्या क्या तलाश करते हैं .....

ख़ुद को ख़ुद में पाने की एक चाह है यहाँ
प्यार का एक पल मिलता है यहाँ धोखे की तरह
बरसती इन चँद बूंदों में सागर तलाश करते हैं
घायल रूहों में अब भी जीने की आस रखते हैं

जाने लोग यहाँ क्या-क्या तलाश करते हैं .....

शुक्रवार, 18 नवंबर 2011

एक मासूम प्यार की आशा

काश मैं होती धरती पर बस उतनी
जिसके उपर सिर्फ़ आकाश बन तुम ही चल पाते
या मैं होती किसी कपास के पौधे की डोडी
जिसके धागे का तुम कुर्ता बना अपने तन पर सजाते
या मैं होती दूर पर्वत पर बहती एक झरना
तुम राही बन वहाँ रुक के अपनी प्यास बुझाते
या मैं होती मस्त ब्यार का एक झोंका
जिसके चलते तुम अपने थके तन को सहलाते
या मैं होती दूर गगन में टिमटिम करता एक तारा
जिसकी दिशा ज्ञान से तुम अपनी मंजिल पा जाते
यूँ ही सज जाते मेरे सब सपने बन के हक़ीकत
यदि मेरी ज़िंदगी के हमसफ़र कही तुम बन जाते !

शुक्रवार, 21 अक्टूबर 2011

बातें

मासूम सी मेरी बातें
अभी बहुत नादान है

तुम्हारी बड़ी बड़ी बातो से
यह बिल्कुल अनजान है,

करने हैं अभी कई
छोटे छोटे काम मुझको..

बिखरे घर को
फिर से सजाना है..

मुरझाये पौधों को
पानी पिलाना है..

संवारना है अभी
टूटे हुए रिश्तों को,

बिखरे हुए हैं शब्द
उनको कागज पर बिछाना है..

है यह काम बहुत छोटे छोटे
पर इसी से जीवन को सजाना है

तुम्हारी बातें हैं बहुत बड़ी
अभी उन में दिल नही उलझाना है!!

गुरुवार, 29 सितंबर 2011

एक नही मिलता ज़ो प्यार से मेरा नाम पुकारे !!

तन तो  थक कर  चैन पा  गया मेरा
पर मनं क़ी थकन  अब कौन उतारे
खड़ी  हूँ मैं भीड़ में तन्हा ऐसे  
जैसे कोई किश्ती हो साहिल  किनारे

एक शोर सा दिल में जाने यह है कैसा
एक आग दिल में कोई जैसे तूफ़ान उठा ले
अन्जाना अंधकार है  मेरे चारो तरफ़
करता है दूर सितारो से भरा गगन कैसे इशारे

बिखरें   हैं चारों  तरफ़ धूल भरे यह रास्ते
मेरी मंजिल  है कहाँ, कौन सा रास्ता  अब पुकारे
मिलने को मिलता है यहाँ  सारा जहान हमको
एक नही मिलता ज़ो प्यार से मेरा नाम पुकारे !! 

गुरुवार, 30 दिसंबर 2010

एक नयी शुरूआत

आओ करें एक नयी शुरूआत
इस बिखरी हुई ज़िंदगी की
एक नये अंदाज़ से इसको संवारें
दिल की दीवारों को रंगें
अब नये रंग से
और पुराने ज़ख़्मों की छत पर
एक खपरैल नया डालें,

फेंक दें बाहर,
पुरानी यादों का कूड़ा
कुछ उम्मीद के नये पर्दे सजा लें
मिटा के दिल से दर्द का अंधेरा
प्यार की जूही, चंपा महका लें,

सजाएँ आँगन को अब
खिलखिलाती चाँदनी से
और तारो से अपना अंबर सजा लें

रहने न पाए अब कोई भी दरार
देखो, अब यह प्यार का घर है
आओ इसको मंदिर सा सजा लें!!

 साया किताब से