रविवार, 23 नवंबर 2008

हिंद युग्म पर साया की बात

प्यार के एक पल ने जन्नत को दिखा दिया
प्यार के उसी पल ने मुझे ता -उम्र रुला दिया
एक नूर की बूँद की तरह पिया हमने उस पल को
एक उसी पल ने हमे खुदा के क़रीब ला दिया !!


हिन्दी-चिट्ठाकारी से जुड़े लोगों में ऎसा कौन होगा जो इन पंक्तियों की लेखिका "रंजना भाटिया" से नावाकिफ़ हो।रंजना भाटिया चिट्ठा-जगत में एक जाना-माना नाम है। हिन्द-युग्म खुद को इसलिए सौभाग्यशाली मानता है,क्योंकि यह नाम सबसे ज्यादा युग्म के करीब है। जाने कितनी हीं कविताओं, कहानियों और बाल-रचनाओं से इन्होंने युग्म को सुशोभित किया है

मूल रूप से हरियाणा के रोहतक जिले के कलनौर की रंजू (प्रशंसकों के बीच इसी नाम से प्रसिद्ध हैं ) हरिवंश राय बच्चन, अमृता प्रीतम और दुष्यंत कुमार को पढना ज्यादा पसंद करती हैं। इन मनीषियों के लेखन का असर हीं था कि रंजू जी में बचपन से हीं साहित्य ने घर कर लिया था। बालपन में कविताएँ कैसे जनमती हैं, इसके बारे में याद करते हुए ये कहती हैं-"
यूँ ही एक बार हमारे घर की परछती पर रहने वाली एक चिडिया पंखे से टकरा मर गई उसको हमारी पूरी टोली ने बाकयदा एक कापी के गत्ते को पूरी सजा धजा के साथ घर के बगीचे में उसका अन्तिम संस्कार किया था और मन्त्र के नाम पर जिसको जो बाल कविता आती थी वह बोली थी बारी बारी .. मैंने बोली थी..चूँ चूँ करती आई चिडिया स्वाहा ..दाल का दाना लायी चिडिया स्वाहा...:)" अब तक इनकी कई कविताएँ दैनिक जागरण,अमर उजाला और भाटिया प्रकाश[मासिक पत्रिका] आदि में छप चुकी हैं।

हाल में हीं रंजू जी की पुस्तक "साया" प्रकाशित हुई है। पुस्तक-प्रकाशन से जु्ड़े महत्त्वपूर्ण पलों को याद करते हुए ये कहती हैं-
"किताब का काम मैंने इसके पब्लिश होने से महीने पहले शुरू कर दिया था ..अभी तक मैं हजारों की संख्या में कविताएं लिख चुकी हूँ ..कहाँ कब पोस्ट करी अब यह मुझे भी ठीक से याद नही हैं :) पर एक बार एक नियमित पाठक ने सबके लिंक समेत मुझे मेरी लिखी कविताओं के लिंक भेजे तब मैंने जाना :) उस में से जो बहुत पसंद की गई थी वह चुनी और कुछ जो मुझे पसंद थी वह ली इस तरह कुल मिला कर यह ५२ रचनाये हैं जो ९५ पृष्ठों मेंसिमटी हुई है ..."

हिन्द-युग्म को गर्व है कि रंजू जी जैसी प्रतिभाशाली कवयित्री या यूँ कहिए रचनाकार(कविता, कहानी, बाल-साहित्य सबमें इनके हस्ताक्षर दर्ज हैं) अपनी मंजिल की ओर अग्रसर हैं। इस पुस्तक के प्रकाशन के बाद इन पंक्तियों के लेखक ने रंजू जी से बातें कीं। प्रस्तुत है उस साक्षात्कार के कुछ अंश-

हिंद-युग्म: रंजना जी, सर्वप्रथम तो आपके पहले काव्य-संग्रह के लिए आपको ढेरों बधाईयाँ!
रंजू:बहुत-बहुत शुक्रिया।

हिंद-युग्म: अंतर्जाल पर "रंजना भाटिया" एक चर्चित नाम है. कुछ महिने पूर्व हीं हिंदी-चिट्ठाकारों ने आपको एक सम्मान(स्वर्ण-कमल) से नवाज़ा था। क्या इसी प्रसिद्धि ने आपको अपना काव्य-संग्रह प्रकाशित करवाने को प्रेरित किया या और कोई वज़ह थी?
रंजू: प्रसिद्ध नाम है ? वाह शुक्रिया .:) .नही उस सम्मान से प्रेरित हो कर यह काव्य संग्रह नही आया है ..काव्यसंग्रह के रूप में लाने की भूमिका और विचार इस सम्मान को मिलने से पहले ही बन चुका था .. मेरी कविता को पढने वाले .पसंद करने वाले बहुत से लोगों का अनुरोध था कि यह सब एक किताब के रूप में उनके पास रहे ..और जैसा की मैंने पहले भी बताया है ..कि मेरी दोनों बेटियाँ बहुत अधिक इच्छुक थी इस किताब के लिए .. .पर हर कामका वक्त तय होता है ..सो यह अभी आया ...हाँ स्वर्ण कलम जब मिला तो कई लोगो के लिए मेरा नाम अपरिचित था ,कई तरह की बातें भी सुनी इसी संदर्भ में ..उसी वक्त दिल में ठान लिया था कि जब सब लोगों ने इतना विश्वास जताया है तो हिन्दी ब्लॉग लिखने की दिशा में ठोस कार्य करना है और एक मुकाम बनाना है .तब से निरंतर उसी दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश में लगीं हूँ ..साहित्य और ब्लॉग की दुनिया के बारे में निरंतर लिख रही हूँ ..बाकी आप सब का सहयोग अब तक इस दिशा में मिला है आगे भी चाहती हूँ ..

हिंद-युग्म: आपने अपनी पुस्तक का शीर्षक "साया" हीं क्यों चुना.....कोई खास कारण?
रंजू: साया ही क्यूँ चुना नाम .? .[रोचक प्रश्न है :) ] जब किताब लिखने के बारे में सोचा तो यही नाम आया दिमाग में .इसका कारण यह था कि हम सब एक कल्पना बना कर ही उसी के बारे में लिखते हैं .हर किसी के दिलो दिमागपर कोई अक्स ,चाहे वह किसी बहुत अपने का हो या कह ले कि कोई सपना सा हर कोई बुन लेता है और फ़िर उसकोसंबोधित कर के लिखता है ..दार्शनिक भाषा में कहे तो यह ज़िन्दगी ही एक साया है जिसके पीछे हम निरन्तर भागते रहते हैं ..और हाथ में अंत तक कुछ नही आता ...:) ..बहुत पहले से ही जब मैंने लिखना शुरू किया .ख़ासकर कविता तो मेरे जहन में एक साया सा साथ रहता है ..और फ़िर सब लिखा जाता ..कभी उस साए ने कोई चेहरा नहीं लिया बस सामने रहा यूँ ही ..:) सो इसका नाम साया रखा



हिंद-युग्म: अमूमन आप प्रेम-कविताएँ लिखती हैं। क्या "साया" भी प्रेम-कविताओं का संग्रह है, या फिर पाठकों को काव्य के दूसरे रसों के रसास्वादन का भी अवसर प्राप्त होगा?
रंजू: हाँ मैंने अधिकतर प्रेम रस में डूबी ही कविता लिखी है .पर इस किताब में आपको सभी रस देखने को मिलेंगे इस में दर्द भी है ..सूफी सा लिखा भी है और आम ज़िन्दगी से जुडा हुआ भी है ....

जैसे ज़िन्दगी से जुड़ी कुछ पंक्तियाँ हैं ..

..
नयनों का हर ख्वाब है यहाँ टूटा
रंग है पर कैनवास लगता है झूठा
मिलते यदि सच्चे रंग प्यार के मुझको
तो यह दिल रंग भरे ख्वाब सजा लेता .....

या प्यार से जुड़ी पंक्तियाँ है ..

कोई भी हो मेरे सिवा प्यारा ज़िन्दगी में तेरी
बस मेरी आरजू ,मेरी मोहब्बत हो त्रिशंगी में तेरी
इन उम्मीदों को मेरी वफ़ा दो तो मानूँ
कुछ वादे मोहब्बत के हँस के निभा तो जानूँ

तब तेरे प्यार को मैं सच मानूँ ...

इसी तरह से सब रंग समेटने कि कोशिश कि है मैंने इस में ..अब लोग इसको कितना पसंद करते हैं ...यह तो किताब पढने वालो के विचारों को जान कर ही
पता चलेगा :)


हिंद-युग्म: आप हिंद-युग्म की एक सक्रिय सदस्य रही हैं....हिंद-युग्म को आपने अपनी रचनाओं से सुशोभित किया है। साथ हीं साथ आपके दो व्यक्तिगत ब्लाग्स भी हैं। पाठक यह जानना चाहेंगे कि "साया" में संग्रहित रचनाएँ नई हैं या कुछ पहले भी युग्म पर या आपके ब्लाग पर प्रकाशित हो चुकी हैं?
रंजू: इस संग्रह में कुछ मेरे ब्लॉग से और कुछ हिंद युग्म से हैं रचनाये जो लोगों ने बहुत पसंद की थी ..कुछ नई भी हैं ..जो अभी तक कहीं पोस्ट नहीं की है |

हिंद-युग्म: प्रथम काव्य-संग्रह प्रकाशित होने का अनुभव कैसा रहा? लोगों की प्रतिक्रियाओं से आप कितनी संतुष्ट हैं?
रंजू: अभी तो यह हाथ में आया है तो नवजात शिशु को छूने जैसी अनुभूति हो रही है ..बहुत अच्छा लगा रहा है । अपनी ही लिखी रचनाओं को एक किताब में एक साथ देखना ...लोगों की प्रथम प्रतिकिर्या बहुत उत्साहजनक मिली है ..बहुत से बधाई संदेश मिले हैं और किताब को पाने का आग्रह भी है ..बाकी आगे देखते हैं :)

हिंद-युग्म: हम सभी जानते हैं कि आप "अमृता प्रीतम" की लेखनी की बहुत बड़ी प्रशंसक रही हैं। उनपर आलेख नियमित रूप से आपके ब्लाग पर नज़र आते हैं। आपकी पुस्तक "साया" क्या उन्हीं को समर्पित है....अमृता प्रीतम की साहित्य-यात्रा पर किसी पुस्तक की कोई योजना?
रंजू: अमृता प्रीतम मेरी गुरु .मेरे लिखने की प्रेरणा रही है शुरू से ही .मेरी कलम से जो कुछ लिखा गया है वह उन्ही के विचारों की ही देन है ..यह एक किताब क्या मेरा पूरा लेखन ही उनको समर्पित है ..हाँ उनके लेखन को ले कर बहुत सी योजनाये हैं दिमाग में ...नई पीढी तक उनके लेखन को पहुंचाना है ..इस दिशा में बहुत काम करना चाहती हूँ ..कुछ इस दिशा में उनको लेकर ब्लॉग में लिख भी रही हूँ ..बाकी आगे जो कुछ लिखूंगी वह भी आपके सामने जल्द ही आएगा | बस वक्त आने दे :)

हिंद-युग्म: इंटरनेट पर बाल-साहित्य एवं कहानी-लेखन पर भी आपने उल्लेखनीय कार्य किया है। भविष्य में इन विधाओं में कोई पुस्तक लिखना चाहेंगी?
रंजू: हाँ जरुर ...बाल उद्यान पर या बच्चो के लिए लिखना मेरे प्रिय विषयों में से एक है ...योजना तो है की बच्चो के लिए एक किताब जिस में विज्ञान से जुड़ी कहानियाँ ,कविताएं ,और रोचक जानकरी हो ..साथ ही बाल साहित्य कुछ इस तरह से रोचक ढंग से प्रकाशित हो कि बच्चो की रूचि किताबों में बनी रहे ..इस पर अभी काम कर रही हूँ कोई अच्छा प्रकाशक मिला तो एक किताब जल्दी ही इस पर भी लाने की योजना है भविष्य में मेरी ..बाकी जो ईश्वर की इच्छा :)

हिंद-युग्म: समकालीन हिंदी-साहित्य क्या सही रास्ते पर है? आपकी दृष्टि में अंतर्जाल पर हिंदी का प्रचार-प्रसार क्या सही तरीके से हो रहा है? आपके अनुसार और क्या किये जाने की आवश्यकता है?
रंजू: अंतरजाल आज सब लोगों तक अपनी पकड़ बना चुका है ..और इस दिशा में बहुत कुछ हो भी रहा है | हिन्दीब्लॉग की संख्या निरन्तर बढ़ रही है ..यह हिन्दी भाषा के लिए एक सुखद बात है ...मेरी दृष्टि में हिन्दी ब्लॉग परयदि सार्थक लिखा जाए और अच्छा लिखा जाए तो यह जल्द ही अपनी पकड़ बना लेगा .पर कई बार यहाँ बहसबेकार की बातों पर हो जाती है वह अच्छा नही लगता है ..ब्लॉग बेशक अपने दिल की बातों को लिखने का बेहतरमाध्यम है पर इस में किसी ध्रर्म विशेष या व्यक्ति विशेष को लेकर लिखना पढ़ना दुखद लगता है ...अच्छा लिखाजाए जो कुछ प्रेरणा भी दे सके ..तो यह हिन्दी प्रसार प्रचार का एक बहुत ही अच्छा माध्यम बन सकता है |

हिंद-युग्म: हिंद-युग्म के बारे में आपके कुछ विचार........
रंजू: हिंद युग्म हिन्दी प्रसार प्रचार की दिशा में बहुत ही बेहतरीन कार्य कर रहा है ..मुझे इसके बाल उद्यान औरआवाज़ बहुत ही अच्छे लगते हैं ..हिंद युग्म से आगे बहुत अपेक्षाएं हैं हिन्दी जगत की ..वह निरंतर आगे बढे औरहिन्दी भाषा को यूँ ही आगे बढाए यही दुआ है मेरी |

हिंद-युग्म: भविष्य में आप इसी तरह सफ़लता का परचम लहराती रहें.....यही कामना एवं दुआ करताहूँ.....आपको पुन: आपकी नई पुस्तके के लिए ढेरों बधाईयाँ
रंजू: बहुत बहुत शुक्रिया ..आप सब का प्यार यूँ ही बना रहे तो यह रास्ता और भी आसान हो जायेगा

हिंद-युग्म: जो लोग पुस्तक मंगाना चाहते हैं.......उन्हें क्या करना होगा? पुस्तक किस तरह उपलब्ध हो सकतीहै?
रंजू: जो यह किताब पढ़ना चाहते हैं वह सीधे मुझसे मेरे मेल आई डी पर मुझसे संपर्क कर सकते हैं ..मैं उन्हेंभिजवा दूंगी यह किताब ..वैसे यह किताब अयन प्रकाशन द्बारा प्रकाशित है .
हिंद-युग्म: आपने अपना कीमती वक्त दिया इसके लिए धन्यवाद।

आईये हम सब एक साथ दुआ करें कि रंजू जी अपने प्रयास में सफ़ल हों और हाँ, हम सब इस पुस्तक की सफ़लतामें भागीदार बन सकते हैं। कैसे? ...आप सब जानते हैं---पुस्तक खरीद कर :)

-विश्व दीपकतन्हा
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